अंतर्मन से दीप जलाकर
करने की जो धुन पाते है।
‘किरन’अंधेरी रातों में भी,
पथ चमकीले हो जाते है।
बाधाओं के धुंध में भी हम,
विजयगान मधुर गाते है।
हाथ से हाथ मिलाकर रहते,
झंझावत में भी हर्षाते है।
कुछ कर जाने की ख्वाहिश में,
कदम मिलाकर बतलाते है।
भारत तेरे परचम के खातिर
तूफ़ां में दिया जल जाते है।

जय हिंद!🇮🇳                                   जय भारत!🇮🇳

 

              नदियों की कल-कल बहती स्वच्छ निर्मल धार जो घाटों को कूद-कूद कर छूने की ललक पाले अनवरत अमृत लेकर बहती हुई संगीत की सरगम सी और नवपल्लव से सराबोर हरियाली को बिखेरती पेड़- बाग और जंगल जिनमे  विशालकाय पीपल, बरगद, पाकड़, देवदार को देखकर अनाशय ही साक्षात ईश्वर का आभास होता है।
गगन छूते पर्वतमालाओं के बीच से होकर गुजरते प्रकृति के अनुपम और अनमोल सौंदर्य जिसमे विभिन्न प्रकार जड़ी-बूटी , वनस्पतियों और फूलों की गंध नासिका से होकर कलेजे तक उतरकर जो लौकिक जगत में अलौकिकता का बोध कराती है। पशु-पक्षियों की गुंजन और चहचहाहट की मधुर तान से वातावरण में जिजीविषा उत्पन्न कर देने वाली प्रभात-संध्या से जीवन को जो ऊर्जा और तरुणाई मिलती है।  संस्कृति, संस्कार, आस्था, स्नेह, सद्भावना, शौर्य और प्रेम की धरा पर मानवता का जो प्रस्फुटन हुआ है उसी “वसुधैव कुटुम्बकम” की ध्येय सूत्र पर हमारी आत्मा ही रची बसी है। महात्मा बुद्ध के शांति और अहिँसा का ध्वज विश्वपटल पर फहराया हुआ हो चाहे धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद जी का अभिभाषण। शासन सत्ता में अशोक महान के अखंड भारत का मूर्त रूप देखना हो चाहें महाराणा प्रताप जैसा त्याग व पराक्रम जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि की स्वाधीनता में झोंक दिया। विश्वविजेता बनने की चाहत रखने वाला सिकन्दर को झुकाने की कूबत रखने वाले चंद्रगुप्त मौर्य   हो या राजनीति और कूटनीतिज्ञ के शिखर पर आसीन चाणक्य । समाज के ठेकेदारों को आईना दिखाने के लिये कबीर हो चाहे ईश्वरचंद्र विद्यासागर और राजाराम मोहन राय हो। सदियों पहले अपाला-घोषा-लोपामुद्रा हो या जन-जन में शिक्षा की महत्ता बताने वाले सावित्रीबाई फुले। शूरवीर और बलिदानी कौमों की फेहरिस्त में कैसे-कैसे रणबाकुरों ने जिनमे शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह स्मृतिपटल पर सदैव अमर रहेंगे। देश मे स्वाधीनता संग्राम  के समय क्रांतिकारी जलजला लाने वाले भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला खां सुखदेव राजगुरु हो चाहे फिरंगियों के देश मे जाकर डायर को मारने वाला सूबेदार उधम सिंह। स्वतंत्रता के लिए किसानों का विद्रोह हो चाहे सन्यासियों का आंदोलन हो यहाँ तक कि कान्हू-सन्थाल-बिरसा मुंडा और कितने गुनमान चेहरों ने आहुति दी है। अहिँसा के बल पर भारतीयों को जगाने वाले महात्मा गांधी चाहें सात समुद्र पार करके विदेशी ज़मीं से प्रत्यक्ष सेना को तैयार करके भारत को आजाद कराने के लिए कृत संकल्पित हमारे आदर्श बाबू सुभाष चंद्र बोस ही क्यो न रहे हो। इत्यादि सभी महान विभुतियां ने इस देश को अपने शक्ति के परें भी जाकर बहुत कुछ दिया है।
            समय के साथ बदलते परिदृश्य में राष्ट्र की एकता, अखंडता , पर्यावरणीय, सामाजिक, मानवीय, वैज्ञानिकी, महान व्यक्तित्व, उच्च आदर्श, सांस्कृतिक विरासत,विलुप्त हो रही लोक कलाएं एवं धरोहरों के प्रति नई पीढ़ी में उनके प्रति आदर, सम्मान, संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों को सौंपकर परिमार्जन कर आगे बढ़ाना ही “आजाद सेवा समिति” का उद्देश्य है। इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विगत पंद्रह वर्षो से क्षेत्र, कस्बो, जिलों एवं प्रदेशो में हम सभी एक्टिविस्ट कार्य करते रहे है। सभी पदाधिकारियों के सलाह एवं परामर्श से इस संस्था को पंजीकृत करने का कार्य किया गया जिससे कि संस्था के आयाम को और अधिक विकसित करके जन-जन तक पहुँचा जा सके।
         आमी नदी के प्रवाह से लेकर राप्ती नदी के विस्तार तक जिनमे गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बस्ती, गोण्डा,बलरामपुर ,श्रावस्ती,अम्बेडकरनगर,सुल्तानपुर,फैज़ाबाद,बनारस, चंदौली, महराजगंज,मऊ,जौनपुर, गाजीपुर जिलो सहित उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में भी में संस्था हमारी चौमुखी क्रियाशीलता के साथ अपने दायित्वों को निभा रही है।पूर्वांचल , गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में एम्स की मांग के लिए लखनऊ तक पदयात्रा की ,फलतः आज यहाँ एम्स का निर्माण हो गया है ।
महिलाओं, बालिकाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बालको को निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कम्प्यूटर प्रशिक्षण दी जा रही है। साथ ही साथ सिलाई-कढ़ाई-बुनाई, ब्यूटिशियन, पापड़-अचार बनाने जैसे प्रशिक्षण दिए जा रहे है जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाया जा सके।
        विगत कई वर्षो से विभिन्न जिलों में रक्तदान का कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। पुलवामा हमले में घायल सैनिकों के उत्साह और भारतीय सैनिकों के सम्मान में “शौर्यमयी रक्तदान शिविर” का आयोजन किया गया जिसके उपलक्ष्य में 14 जून को “विश्व रक्तदाता दिवस” के अवसर पर जिलाधिकारी महोदय “विजयेंद्र के पांडियन” और मुख्य चिकित्साधिकारी “श्री शिवाकांत तिवारी” जी द्वारा जिले में सर्वाधिक यूनिट रक्तदान करनें पर संस्था को  सम्मानित करने का कार्य किया है। भूकम्प और बाढ़ जैसी आपदाओं में संस्था के निःस्वार्थ सेवा को देखते हुए विभिन्न संस्थाओं और मंत्रालयों ने सम्मानित करने का कार्य किया है।
अभी तक संस्था हमारी लाखों वृक्ष लगवा चुकी है और संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्य विभिन्न मांगलिक अवसरों पर वृक्षारोपण करने का कार्य करते है। साथ ही साथ सबको ऐसा ही करने का अलख जगा रहे है।
यदि कोई भी जन्मदिन, शादी की वर्षगाँठ, स्मरणोत्सव एवं किसी भी मंगलकार्य पर वृक्ष लगाना चाहता है तो  हमारी साईट्स www.azadsevasamiti.com पर जाकर CREATE EVENT पर क्लिक करके हमसे संपर्क कर सकता है। स्थान हम आप मिलकर निर्धारित करते है वृक्ष लेकर हमारी टीम पहुँचेगी इच्छुक को बस सशरीर उपस्थित होना है। “समझ आपकी दायित्व हमारा!”
औद्योगिक परिक्षेत्रों में हो रहे विभिन्न प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण और उद्योगों में हो रहे श्रमिको के शोषण के खिलाफ एवं किसानों की हक के लिए हमारी संस्था सदैव उनकी लड़ाई लड़ने का कार्य करती है।
हम भारतीय नागरिकों का परम कर्तव्य हैं कि हम अपने मौलिक अधिकारों से कही ज्यादा मौलिक कर्तव्यों पर अमल करें जिससे हमें एक अखंड, सुरक्षित, स्वच्छ, सुंदर, स्नेहमयी, सुविख्यात एवं सौहार्दयपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सके!
🇮🇳”आजाद सेवा समिति”🇮🇳 के समस्त पदाधिकारियों और सदस्यों के तरफ से आप सभी देशवासियों को ढेर सारी शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं।
जिंदाबाद!!